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चौपाल का महत्व भारतीय इतिहास में सदियों से रहा है, जहाँ बैठकर आम आदमी की दिन भर की बोरियत और थकन दूर हो जाती है| आज के आधुनिक यूग में भी चौपाल का महत्व कम नहीं हुआ है| लेकिन हम लोग अपनी तेज रफ्तार जिन्दगी में हँसना और बतियाना तो लगता है की भूल ही गए है| चौपाल.को.इन पर हम फ़िर से वहीं लौटने की कोशिश करेंगे | हमारी कोशिश रहेगी आपके चहरे पर मुस्कुराहट सजाने की | यहाँ हम सुनेंगे आपकी बात | आप हमें बता सकते है कोई भी ऐसी बात जो आप सब के साथ बांटना चाहते है, चाहे वो बात आपके घर की हो या समाज की या देश की | सुखद घटना हो या दुखद |
इस चौपाल मैं शामिल होने के लिया आपको कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं, बस एक क्लिक पर आपके सामने हाज़िर है.. आपकी अपनी चौपाल,
आपकी दिन भर की थकान, परेशानी, चिंता और बोरियत यहाँ आकर दूर होगी, ऐसा दावा है हमारा..
एक तरह की सामाजिक जिम्मेवारी का काम कर रहे हैं हम और आप.. जहाँ आपनी जड़ों से दूर जा चुके इंसान को वापस उसी जमीन की अहेमियत याद दिलाते हैं. आज इंसान जहाँ भी है.. आख़िर है तो वो उसी मिटटी का हिस्सा, जहाँ से उसने शुरुआत की थी.
और यकीं मानिये आजकल की इस व्यस्तता भरी जिंदगी मैं वाकई ऐसी छोटी छोटी बातें एक सुकून का एहसास देती हैं..
इसी एहसास को फिर से जिन्दा करने का प्रयास है.. ये.. हमारा और आपका
... चौपाल .. एक शुरुआत
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